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सिंधुताई सपकाल को लोग प्यार से ‘अनाथों की मां कहते थे ,कल उनका दुःखद निधन, पिछले डेढ़ महीने उनका इलाज पुणे के गैलेक्सी हॉस्पिटल में जारी था, पिछले साल उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था, उन्होंने मंगलवार शाम 8.30 बजे अंतिम सांस ली, आज पुणे में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा

VIGYAPAN
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सिंधु सपकाल को अक्सर सिंधुताई या मां कहकर पुकारा जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथ बच्चों की जिंदगी संवारने में लगा दिया। 1400 से ज्यादा अनाथ बच्चों का पालन-पोषण किया। उत्कृष्ठ समाज सेवा के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (Padma Shri) से सम्मानित किया था। सिंधुताई सपकाल को लोग प्यार से ‘अनाथों की मां कहते थे।

सिंधुताई सेप्टीसीमिया से पीड़ित थीं और पिछले डेढ़ महीने उनका इलाज पुणे के गैलेक्सी हॉस्पिटल में जारी था। पिछले साल उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने मंगलवार शाम 8.30 बजे अंतिम सांस ली। आज पुणे में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

राष्ट्रपति बोले- सिंधुताई का जीवन सेवा की प्रेरक गाथा
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने डॉ. सिंधुताई सपकाल के निधन पर दुख जताया और कहा कि सिंधुताई का जीवन साहस, समर्पण और सेवा की प्रेरक गाथा था। वह अनाथों, आदिवासियों और हाशिए के लोगों से प्यार करती थीं और उनकी सेवा करती थीं। उनके परिवार और अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदनाएं।

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