धर्म

नवरात्रि का पर्व 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन महत्वपूर्ण शक्तिपीठ के बारे में जिनके बारे में हर व्यक्ति जानना चाहता है। कहा जाता है माता रानी के 52 शक्तिपीठ हैं जिनके दर्शन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं ,ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं 6 शक्तिपीठों के बारे में।

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नवरात्रि का पर्व 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन महत्वपूर्ण शक्तिपीठ के बारे में जिनके बारे में हर व्यक्ति जानना चाहता है। कहा जाता है माता रानी के 52 शक्तिपीठ हैं जिनके दर्शन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं 6 शक्तिपीठों के बारे में।

हिंगुल/हिंगलाज- कहा जाता है यहां मां सती का सिर का ऊपरी भाग ब्रह्मरंध्र गिरा था। जी हाँ और पाकिस्तान के कराची में स्थित इस शक्तिपीठ को हिंगुलाज माता, हिंगलाज माता और कोट्टरी के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस शक्तिपीठ में स्थापित भैरव को भीमलोचन के नाम से जाना जाता है।

शर्कररे माता- कराची पाकिस्तान के सुक्कर स्टेशन से होकर पहुंचा जा सकता है जी हाँ और यहीं पर माता रानी की आँख गिरी थी। कहा जाता है यहाँ माता को महिषासुरमर्दिनी और भैरव को क्रोधिश कहा जाता है।

सुगंधा या सुनंदा माता- यह बांग्लादेश के शिकारपुर में स्थित है। जी दरअसल बरिसल से 20 किमी दूर सोंध नदी किनारे माँ सुगंधा का मंदिर स्थित है। कहते हैं यहाँ माता की नासिका गिरी थी और यहाँ माता को सुनंदा और भैरव को त्र्यंबक कहते हैं।

माँ महामाया- कश्मीर में पहलगाँव के निकट स्थित है यह शक्तिपीठ। यहाँ माता का कंठ गिरा था। कहते हैं यहाँ माँ को महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहते हैं।

माँ सिद्धिदा (अंबिका)- हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित है यह शक्तिपीठ। यहाँ माता की जीभ गिरी थी और इसे ज्वालामुखी या ज्वालाजी स्थान भी कहते हैं। कहते हैं यहाँ पर माँ को सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव को उन्मत्त कहते हैं।

माँ त्रिपुरमालिनी- पंजाब के जालंधर में छावनी स्टेशन के नजदीक है। जी हाँ और यहाँ एक तालाब जिसे देवी तालाब कहते है, शक्तिपीठ है। कहा जाता है यहाँ माता का बायाँ वक्ष गिरा था और यहाँ पर माँ को त्रिपुरमालिनी और भैरव को भीषण कहते हैं।

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